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Magic Ring (1965)

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  • Release Date1965
  • FormatB--W
  • LanguageHindi
  • Length3842.61 metres
  • Number of Reels14
  • Gauge35mm
  • Censor RatingU
  • Censor Certificate Number42791
  • Certificate Date19/10/1964
  • Shooting LocationJyoti Studios, Kennedy Bridge, Bombay-7
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मनुष्य ही अपने मुक़द्दर को बनाता है और बिगाड़ता है। सुन्दर एक ग़रीब राजपूत है, वह माँ को समझाता है कि माँ-

"इज्जत उसे मिली जो वतन से निकल गया,
वह फूल सर चढ़ा जो चमन से निकल गया।"

माँ ग़रीब होने की वज़ा से सुन्दर को परदेश जाने की आज्ञा दे देती है। सुन्दर को रास्ते में पाँच डाकुओं से टकराना पड़ा, उसने सबको मौत के घाट उतार दिया। शामगढ़ के महाराज को जब मालूम हुआ तो उन्होंने सुन्दर को बहुत सा धन दिया और दरबार में शामिल कर लिया। शामगढ़ की राजकुमारी शोभा, सुन्दर की सुन्दरता व बहादुरी पर बुरी तरह मर मिटी और दिन रात उससे मुलाकातें होने लगी। परन्तु शामगढ़ के राजा ने पहले से ही अपने प्रधान के पुत्र शेरंिसह से शोभा की शादी की बातचीत तय की हुई थी, यह देखकर शेरसिंह को सुन्दर व शोभा का मिलना सहन न हुआ और राजा से सुन्दर शोभा की प्रेम कहानी सुनाई, राजा असन्तुष्ट हुआ और सबूत मांगा। रात को सुन्दर शोभा मिले, दोनों प्रेम सागर में डूबे हुये थे, इतने में दासी ने आकर ख़बर दी कि महाराज आ रहे हैं। सुन्दर माली बन गया और दासी सुन्दर बनकर बैठ गई, राजा ने आकर सुन्दर को मारा, मगर वह दासी निकली, राजा और भी गुस्सा हुआ। राजा ने रात को सपने में एक जादुई अंगूठी जिसके दाबे बौना राक्षस आता है वह और बोलती मैना जो बीते दिन और आने वाले समय की ख़बर देती है देखा। सबेरा हुआ, राजा ने रानी को रात का सपना बताया और सलाह की, कि शर्त रख दें कि जो कोई जादुई अंगूठी और बोलती मैना लायेगा उसी के साथ राजकुमारी शोभा का विवाह होगा।

प्रधान ने दरबार में शादी की शर्त एलान की, शेरसिंह और सुन्दर दोनों ने बीड़ा उठाया, राजा ने दोनों को आज्ञा दी, सुन्दर शर्त पूरी करने से पहले राजकुमारी से मिलने लगा, पीछे पीछे शेरसिंह भी आया, सुन्दर शोभा प्यार की बातों में लगे थे कि इतने में शेरसिंह भी आ गया, दोनों में लड़ाई होने लगी। राजा और प्रधान घूमते घूमते उधर आये, राजा को देखते ही सारा मामला ठन्डा हो गया, राजा ने शेरसिंह व सुन्दर को जनाने बाग़ में आने के लिये डांटा। इतने में कामरूदेश का जादूगर सियालु काली देवी पर भेंट चढ़ाने के लिये राजकुमारी शोभा को उठा ले जाता है। राजा विलाप करने लगता है, सुन्दर राजा को तसल्ली देकर जादुई अंगूठी, बोलती मैना और शोभा को ढूंढने निकलता है। पीछे शेरसिंह भी यही प्रतिज्ञा करके घर से निकलता है। लेकिन उससे पहले शेरसिंह ने हीरस ह वीरसिंह को जो कि सुन्दरसिंह के साथी थे, राजा से कहकर जेल में डलवा दिया, जहां पर इन्हें तिलस्मी आइना और जादुई अंगूठी जिसके दाबे बौना राक्षस आता है मिल जाती है, इस बौने की मदद से यह लोग जेल से बाहर निकल जाते है। कामरूदेश का जादूगर सियालु बोलती मैना से पूछता है कि मैं जिसकी याद में तड़प रहा हूं क्या वह मिलेगी, मैना जवाब देते है कि तुम शामगढ़ की राजकुमारी शोभा को उठा लाओ, एक दिन रम्भा की पालक माता रंगा देवी को काली देवी पर भेंट चढ़ाने के लिये शोभा की ज़रूरत पड़ेगी, उस वक्त शोभा को देकर अपनी प्रेमिका रम्भा का हाथ मांग लेना।

शामगढ़ की राजकुमारी शोभा काली देवी पर भेंट चढ़ाई गई या नहीं? सियालु रम्भा को पा सका या नहीं? सुन्दर राजकुमारी से मिला या नहीं? शेरसिंह द्वारा बिछाये गये जाल का क्या अन्जाम हुआ? शोभा की शादी शर्त पूरी हुई या नहीं? मगर शोभा की शादी हुई तो किसके साथ? यह  सब देख्ने के लिये स्क्रीन पर मुलाहिज़ा फरमाइये।

[From the official press booklet]

Cast

Crew

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